बेअदबी कानून से पहले समाज के मूल मुद्दों पर ध्यान दे पंजाब सरकार

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 7 अप्रैल 2026: 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मुद्दे पर बुलाया जाना एक गंभीर विषय है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि हमारे देश और विशेषकर पंजाब में असंख्य धार्मिक ग्रंथ मौजूद हैं। सरकार यह स्पष्ट करे कि आखिर किन-किन ग्रंथों को इस कानून के दायरे में शामिल किया जाएगा। यदि हर ग्रंथ के लिए अलग-अलग दंड तय करना है, तो यह न केवल जटिल प्रक्रिया होगी, बल्कि इससे समाज में भ्रम और विवाद की स्थिति भी पैदा हो सकती है। कानून का उद्देश्य स्पष्ट और व्यावहारिक होना चाहिए, न कि ऐसा जो आगे चलकर नए विवादों को जन्म दे। यह शब्द पूर्व सेहत मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने कहा।
प्रो. चावला ने कहा कि सरकार समाज की वास्तविक स्थिति को देखें तो आम नागरिक, विशेषकर गरीब वर्ग, आज भी सम्मान और न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। पुलिस थानों से लेकर कचहरियों तक आम आदमी को अक्सर अपमान का सामना करना पड़ता है। न्याय की प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल है कि कई बार पीड़ित व्यक्ति न्याय मिलने से पहले ही टूट जाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या सरकार की प्राथमिकता केवल धार्मिक मुद्दों तक सीमित रहनी चाहिए, या फिर उसे आम जनता की बुनियादी समस्याओं पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए।
महिलाओं के सम्मान का मुद्दा भी उतना ही गंभीर है। आज के दौर में कई जगहों पर अश्लील विज्ञापनों के जरिए महिलाओं की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। यह भी एक प्रकार की सामाजिक बेअदबी ही है, लेकिन इस दिशा में ठोस कदम बहुत कम दिखाई देते हैं। यदि सरकार सच में सम्मान और मर्यादा की बात करती है, तो उसे महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए भी सख्त नीतियां बनानी चाहिए।
इसके अलावा बड़ी संख्या में नवयुवक और युवतियां ठेका या आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे हैं, जहां उन्हें न तो स्थिर रोजगार मिलता है और न ही उचित वेतन। उनकी पूरी जवानी असुरक्षा और आर्थिक तंगी में बीत रही है। आधा पेट खाकर काम करने को मजबूर ये युवा आज के पंजाब की सच्चाई हैं। क्या सरकार को उनके भविष्य की चिंता नहीं करनी चाहिए?
धार्मिक ग्रंथों का सम्मान जरूरी है, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन समाज को आगे बढ़ाने के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना भी उतना ही आवश्यक है। केवल भावनात्मक मुद्दों पर राजनीति करने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जरूरत है कि सरकार शिक्षा, रोजगार, न्याय व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मूलभूत विषयों पर गंभीरता से काम करे।

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