लुधियाना की दिशा कमेटी ने वीबी–जी राम जी बिल का विरोध किया, मनरेगा जारी रखने की मांग

कल्याण केसरी न्यूज़, लुधियाना, 16 जनवरी 2026: लुधियाना जिले की डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कोऑर्डिनेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (दिशा) ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए, प्रस्तावित विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [वीबी–जी राम जी] बिल, 2025 का कड़ा विरोध किया। समिति ने इस बिल को गरीब-विरोधी और ग्रामीण आजीविका के लिए नुकसानदेह बताते हुए, इसे तुरंत वापस लिए जाने की मांग की।
यह बैठक आज यहां जिला प्रशासनिक परिसर में लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की अध्यक्षता में हुई।
इस मौके पर कमेटी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 को बदलने और विशेष रूप से मजदूरी के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय फंडिंग की जगह 60:40 केंद्र-राज्य भागीदारी फॉर्मूला लागू करने के प्रस्ताव पर गहरी चिंता जताई। कमेटी ने कहा कि पंजाब की कमजोर वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह मॉडल उपयुक्त नहीं है।
पंजाब की वित्तीय तंगी का उल्लेख करते हुए प्रस्ताव में कहा गया कि मार्च 2026 तक राज्य का सार्वजनिक कर्ज लगभग 4.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 46 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे हालात में राज्य के लिए अतिरिक्त सामाजिक जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो जाएगा।
कमेटी ने विशेष तौर पर ध्यान दिलाया कि भले ही पंजाब में कृषि अत्यधिक मशीनीकरण पर आधारित है और प्रवासी मजदूरों पर निर्भर है, लेकिन मनरेगा राज्य में कई वर्गों को सुरक्षा प्रदान करती है। यह विशेष रूप से अनुसूचित जाति के मजदूरों के लिए लाभकारी है, जिनकी सक्रिय जॉब कार्ड धारकों में हिस्सेदारी लगभग 70.55 प्रतिशत है।
कमेटी ने खुलासा किया कि वर्ष 2024–25 के दौरान पंजाब में प्रति परिवार केवल 40.8 दिनों का रोजगार ही उपलब्ध कराया गया था, जो 50 दिनों की राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। ऐसे में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने से मनरेगा की कार्यक्षमता और कमजोर हो सकती है तथा मजदूरी भुगतान में देरी का खतरा बढ़ जाएगा।
दिशा कमेटी ने प्रस्तावित नई योजना में आधार-आधारित भुगतानों और मौसमी तौर पर काम रोकने जैसी शर्तों पर भी चिंता व्यक्त की। समिति ने कहा कि इससे गरीब और कमजोर परिवार योजना से बाहर हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप मजबूरी में पलायन बढ़ेगा और ग्रामीण खपत पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
इसी तरह, लुधियाना जिले को लेकर विशेष चिंता जताते हुए, कमेटी ने कहा कि मनरेगा के तहत काम लेने वाले परिवारों में से केवल 1 प्रतिशत ही पूरे 100 दिनों का रोजगार हासिल कर पाए हैं। इस स्थिति में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।
कमेटी ने मनरेगा को पूरी तरह केंद्रीय मजदूरी सहायता के साथ जारी रखने की जोरदार मांग की और किसी भी नीतिगत बदलाव से पहले राज्य सरकारों, मजदूर संगठनों और विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श करने की अपील की।
इसके साथ ही पंजाब सरकार से कहा गया कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाए और काम के अधिकार की रक्षा के लिए कानूनी एवं संवैधानिक विकल्पों की भी तलाश की जाए।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए, सांसद राजा वड़िंग ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार पहले ही मनरेगा को लागू करने में नाकाम साबित हुई है। उन्होंने कहा कि भले ही नया कानून अब लाया जा रहा है, लेकिन पिछले चार वर्षों के दौरान आप सरकार मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रही है।
इस दौरान राजा वड़िंग ने बुड्ढे नाले की सफाई पर हुए खर्च की जांच की भी मांग की। उन्होंने कहा कि भारी राशि खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला वह संसद में भी उठाएंगे। इस अवसर पर श्री फतेहगढ़ साहिब से सांसद डॉ. अमर सिंह भी मौजूद रहे।

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