
कल्याण केसरी न्यूज़, जालंधर, 8 फरवरी 2026: उन्नत कृषि योजना के तहत गांव मंडियाला में कृषि एवं किसान भलाई विभाग की गन्ना शाखा द्वारा दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण लगाया गया।
कैन कमिश्नर पंजाब डा. अमरीक सिंह के निर्देशों और प्रोजेक्ट अधिकारी जालंधर डा. मनधीर सिंह के नेतृत्व में लगाए गए इस प्रशिक्षण कैंप में सहायक गन्ना विकास अधिकारी जालंधर डा. गुरचरण सिंह, डायरेक्टर कीट वैज्ञानिक डा. युवराज सिंह, फसल वैज्ञानिक डा. जशनजोत कौर, गन्ना अनुसंधान केंद्र कपूरथला से डा. अनुराधा, प्रिंसिपल साइंटिस्ट पी.ए.यू. लुधियाना डा. मनिंदर सिंह ने गन्ने की खेतीबाड़ी तकनीकों, कीटों-मकोड़ों की रोकथाम, रोग प्रबंधन, गन्ने की अंतर-फसल तथा किसानों की भलाई के लिए चलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
किसानों को संबोधन करते हुए डा. गुरचरण सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाकर आय बढ़ाने के लिए पंजाब में गन्ने की फसल में अंतर फसलें के तहत रकबा बढ़ाने के लिए प्रदर्शनी प्लॉट लगाए जा रहे है ताकि गन्ना किसानों की अर्थव्यवस्था मजबूत की जा सके। उन्होंने कहा कि कृषि उन्नति योजना का उद्देश्य फसल उत्पादन, तकनीक और बीजों के लिए सहायता प्रदान करके अनाज उत्पादन को बढ़ाना, मिट्टी की सेहत को बहाल करना, किसानों की आय में सुधार करना तथा पोषण सुरक्षा को बढ़ाना है। इस योजना के तहत कृषि एवं किसान भलाई विभाग की गन्ना शाखा द्वारा जागरूकता कैंप और प्रशिक्षण भी लगाए जा रहे है।
उन्होंने कहा कि गन्ना पंजाब की गेहूं, धान और कपास के बाद चौथी ऐसी नकदी फसल है, जो मौसम के बुरे प्रभावों को सहते हुए भी गन्ना किसानों को आय प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा गन्ने की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए बुआई की चौड़ी विधि, अंतर फसलें और मल्चिंग तकनीक का उपयोग करके प्रदर्शनी प्लॉट और जागरूकता कैंप लगाने का प्रोग्राम चलाया गया है, जिसके तहत पंजाब की विभिन्न खंड मिलों के अधिकृत क्षेत्रों में जागरूकता कैंप और प्रदर्शनी प्लॉट लगाए जा रहे हैं। डा. रचना गोइल साइंटिस्ट के.वी.के. नूरमहिल ने किसानों को मिट्टी परीक्षण कराने के लिए प्रेरित किया और संतुलित खादों के उपयोग के लिए कहा।
प्रोजेक्ट अधिकारी (गन्ना) जालंधर पंजाब डा. मनधीर सिंह ने कहा कि प्रति हेक्टेयर गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने से गन्ने की फसल की खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गन्ने की प्रति हेक्टेयर पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य के लिए गन्ना किसानों को चौड़ी विधि अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिला प्रशिक्षण अधिकारी डा. सुखचैन सिंह ने बताया कि गन्ने की फसल में धान की पराली मिलाने से जहां वातावरण को प्रदूषण होने से बचाया जा सकेगा, वहीं सर्दी और गर्मी से फसल का बचाव होने के कारण प्रति हेक्टेयर पैदावार में भी वृद्धि हो सकेगी। डा. गुरप्रीत सिंह ने किसानों को सही मंडीकरण और कृषि आधारित सहायक धंधे अपनाने के लिए प्रेरित किया।
खेती विस्तार अधिकारी नकोदर महिंदर सिंह ने बताया कि पतझड़ ऋतु की गन्ने की फसल से अधिक आय लेने के लिए अंतर फसलें लेना बहुत जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि अंतर फसलें जैसे गेहूं, सरसों, सब्जियां और दालों की खेती करके घरेलू और बाजार की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। सी.सी.डी.ओ. खंड मिल नकोदर मंदीप सिंह ने किसानों से अपील की कि मिल की गन्ना पेराई की क्षमता बढ़ने के कारण गन्ने के तहत अधिक से अधिक रकबा बढ़ाया जाए।
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