भारत–अमेरिका समझौता देश को तबाही की ओर धकेलने की शुरुआत है: कामरेड सेखों

प्रधानमंत्री संसद में उपस्थित होकर समझौते के लाभ स्पष्ट करें

कल्याण केसरी न्यूज़, जालंधर, 10 फरवरी 2026: भारत और अमेरिका के बीच हुआ समझौता देश की अर्थव्यवस्था को धक्का देकर तबाही की ओर ले जाने की शुरुआत करता है। यह विचार व्यक्त करते हुए सीपीआई(एम) पंजाब के सचिव कामरेड सुखविंदर सिंह सेखों ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री को लोकसभा से अनुपस्थित रहने के बजाय संसद में इस समझौते के बारे में स्पष्ट करना चाहिए कि इससे देश को क्या लाभ होगा।
कामरेड सेखों ने कहा कि भारत–अमेरिका समझौता साम्राज्यवादी ताकतों के सामने घुटने टेककर देश को गुलामी की ओर धकेलने वाला है, क्योंकि इसका देश की अर्थव्यवस्था पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत अमेरिका भारत से आयात किए गए सामान पर 18 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, जबकि भारत अमेरिका से आयात होने वाले सामान पर शून्य टैरिफ की शर्त का पाबंद होगा। इसका सीधा अर्थ है कि इस समझौते से अमेरिकी उद्योगपतियों को लाभ होगा और भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के समय भी ऐसे समझौते के लिए प्रयास शुरू किए थे, लेकिन तब स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया गया था। अब मोदी सरकार ने देश के हितों की बजाय साम्राज्यवादी अमेरिका के हितों को अधिक प्राथमिकता देते हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
प्रदेश सचिव ने कहा कि समझौते के अनुसार दूसरा मुद्दा तेल खरीद से संबंधित है, जिसके तहत भारत रूस या ईरान से तेल नहीं खरीद सकेगा और उसे तेल केवल अमेरिका से ही खरीदना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते का सीधा असर देश की कृषि पर पड़ेगा और एक बड़ा कृषि संकट खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पहले भी तीन काले कृषि कानून लाकर खेती को तबाह करने के रास्ते पर चली थी, जिसे देश के किसानों ने संघर्ष के जरिए रोक दिया था। लेकिन अब भारत–अमेरिका समझौते के जरिए देश की खेती को खत्म करने का रास्ता अपनाया गया है।
कामरेड सेखों ने कहा कि यह समझौता साम्राज्यवादी ताकतों के सामने झुककर देश को गुलामी की ओर धकेलने वाला है। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद से अनुपस्थित रहने के बजाय लोकसभा में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करें कि इस समझौते से देश को क्या लाभ होगा।

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