कल्याण केसरी न्यूज़, चंडीगढ़, 6 मार्च 2026: इंटरनेशनल वूमेन डे के अवसर पर एंडोक्राइन सोसायटी ऑफ़ इंडिया (ईएसआई) 7 और 8 मार्च को मोहाली स्थित रेडिसन में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “वी केयर 2026 – वूमेन एंडोक्राइन केयर एंड ईएसआई ओबेसिटी वीक “आयोजित करेगी। इस सम्मेलन में महिलाओं के हार्मोनल स्वास्थ्य और भारत में तेजी से बढ़ रही मोटापा व मेटाबोलिक बीमारियों की समस्या पर विशेष फोकस रहेगा।
यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब मोटापा एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2019–21) के आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग एक चौथाई पुरुष और महिलाएं ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त हैं, जो 2015–16 की तुलना में चार प्रतिशत अधिक है। दिल्ली और पंजाब सहित कई राज्यों में महिलाओं में यह समस्या अधिक देखने को मिल रही है।
सम्मेलन की आयोजन सचिव Dr गगन प्रिया ने कहा कि मोटापा और हार्मोनल विकारों का बढ़ता बोझ इस विषय पर गंभीर वैज्ञानिक चर्चा की आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के जीवन में किशोरावस्था, प्रजनन काल, गर्भावस्था और मेनोपॉज जैसे कई हार्मोनल बदलाव आते हैं, जो उनके दीर्घकालिक मेटाबोलिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा कि मोटापा महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, बांझपन, गर्भकालीन मधुमेह, टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा स्तन और गर्भाशय कैंसर जैसे गंभीर रोगों का खतरा बढ़ा देता है। साथ ही माताओं में मोटापा उनके बच्चों में भी मोटापा और मेटाबोलिक विकारों का जोखिम बढ़ा सकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
सम्मेलन की वैज्ञानिक अध्यक्ष Dr एमी ग्रेवाल ने बताया कि कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक सत्र, पैनल चर्चा और हैंड्स-ऑन वर्कशॉप आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य चिकित्सकों को नवीनतम ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। इन सत्रों में मोटापा, डायबिटीज, थायरॉयड विकार और मेनोपॉज से जुड़ी प्रमुख एंडोक्राइन चुनौतियों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे, जिनमें डोन्ना रायन(पूर्व अध्यक्ष, World Obesity Federation) और निखिल टंडन(प्रोफेसर एवं डीन, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली) शामिल हैं।
इस सम्मेलन में देशभर से एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, चिकित्सक और शोधकर्ता भाग लेंगे। प्रतिभागियों को आठ पीएमसी क्रेडिट आवर्स भी प्रदान किए जाएंगे। आयोजकों के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को व्यवहारिक रणनीतियों में बदलते हुए महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करना है।

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