फ्री ट्रेड समझौते, बिजली संशोधन बिल, चार लेबर कोड रद्द कराने, एमएसपी गारंटी कानून और मनरेगा बहाल करने जैसी मांगों की अनदेखी के खिलाफ रोष

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 14 मार्च 2026: केएमएम (किसान मजदूर मोर्चा) की ओर से देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मोगा रैली के लिए पंजाब दौरे के मौके पर पंजाब के 19 जिलों में 33 स्थानों पर बड़े पुतले बनाकर रोष मार्च करते हुए अर्थी फूंक प्रदर्शन किए गए।
इस मौके पर विभिन्न स्थानों पर हुए प्रदर्शनों के दौरान मौजूद हजारों किसानों और मजदूरों को संबोधित करते हुए किसान-मजदूर नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा मोगा रैली का नाम “बदलाव रैली” रखा गया है और “वसदा रहे साडा पंजाब” का नारा दिया गया है, जबकि मोदी सरकार ने भारत-अमेरिका समझौते में कृषि और डेयरी क्षेत्र को शामिल कर ऐसा नीतिगत फैसला लिया है जिससे पंजाब ही नहीं बल्कि पूरा देश बर्बाद हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है, इसलिए कृषि क्षेत्र पर कॉर्पोरेट का कब्जा करवाने के लिए ऐसे फैसले किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक पंजाब लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाता रहा है और सरकारें इस प्रवृत्ति को खत्म करना चाहती हैं। आम पंजाबी की रोजी-रोटी का साधन कृषि क्षेत्र को तबाह किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मामला यहीं नहीं रुकता। बिजली संशोधन बिल 2025 का मसौदा तैयार है और छोटे व्यापारियों, किसानों तथा देश की बीज अनुसंधान संस्थाओं को खत्म करने वाला बीज कानून भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के बिजली से संबंधित फैसलों का आम उपभोक्ताओं और किसानों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों से जुड़े सभी श्रम कानून खत्म करके कॉर्पोरेट समर्थक चार लेबर कोड लागू कर दिए गए हैं। इससे निजी क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों से यूनियन बनाने का अधिकार भी छीन लिया गया है और काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिए गए हैं, जिससे बंधुआ मजदूरी जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि मजदूरों को मनरेगा के जरिए मिलने वाला थोड़ा-बहुत रोजगार भी छीन लिया गया है। केंद्र सरकार ने मनरेगा के फंड में 40% कटौती कर दी है, जबकि रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात की जा रही है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के दावे करती थी और आंदोलनों के दौरान एमएसपी को कानूनी गारंटी देने तथा किसानों को कर्जमुक्त करने के वादे किए गए थे, लेकिन अब तक पूरे नहीं किए गए। इसके उलट देश और पंजाब में कृषि संकट और गहरा होता जा रहा है। खेती की लागत बढ़ने के कारण किसान और मजदूर आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार ने कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों का डेटा रखना भी बंद कर दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह के आदेशों पर ही हरियाणा के बॉर्डरों पर दिल्ली जाने वाले किसानों को भारी बैरिकेडिंग करके रोका गया और 70 हजार से अधिक अर्धसैनिक बल तैनात किए गए। किसानों, मजदूरों और नौजवानों पर सीधी गोलियां चलाई गईं, जिसमें 21 वर्षीय गांव बल्लो का नौजवान शहीद शुभकरण सिंह मारा गया और कई किसान-मजदूर व नौजवान घायल हुए। उन्होंने कहा कि इस बदलाव रैली का असली मकसद पंजाब में सत्ता हासिल कर जनपक्षीय और लोकतांत्रिक संगठनों की ताकत को कुचलना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गैस और पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर जो स्थिति बनी हुई है उसके लिए भी मोदी सरकार की कमजोर विदेश और आर्थिक नीति जिम्मेदार है, क्योंकि सरकार आंख बंद करके अमेरिका का साथ दे रही है जिसका खामियाजा देश की जनता को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज पंजाब में घरेलू रसोई गैस की कमी दिखाई दे रही है और देश की मोदी सरकार विदेश नीति में सबसे कमजोर साबित हुई है।
इस मौके पर सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि अमृतसर के पुराने सीपी ऑफिस में विशाल एकत्रित होकर किसानों-मजदूरों ने लंबा रोष मार्च किया और दशहरा ग्राउंड में अमित शाह का पुतला फूंका गया। आज के बड़े एकत्रों में प्रस्ताव पास करके मांग की गई कि भारत-पाकिस्तान व्यापारिक रास्ता पूरी तरह खोला जाए, कानून के मुताबिक सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों सहित सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए, जिनमें से कई अपनी सजा से भी अधिक समय जेल में बिता चुके हैं। उन्होंने कहा कि केवल इसलिए उन्हें जेल में नहीं रखा जा सकता क्योंकि वे आपके राजनीतिक विचारों के विरोधी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाई गुरजीत सिंह खालसा की हालत नाजुक होने के कारण लंबे समय से चल रहे टावर मोर्चा के मुद्दे पर पंजाब सरकार को अपने वादे के अनुसार बातचीत करके समाधान करना चाहिए।
आज के कार्यक्रम में शामिल संगठनों में बीकेयू एकता आजाद से जसविंदर सिंह लोंगोवाल, बीकेयू क्रांतिकारी से बलदेव सिंह जीरा, बीकेयू दोआबा से मनजीत सिंह राय, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब से रणबीर सिंह राणा, बीकेयू भट्ठेड़ी से गुरधियान सिंह भट्ठेड़ी, बीकेएमयू से दिलबाग सिंह गिल, बीकेयू बहरामके से बलवंत सिंह बहरामके, किसान मजदूर हितकारी सभा से ओंकार सिंह भंगाला, प्रोग्रेसिव फार्मर फ्रंट से गुरअमनीत सिंह मांगट, मलकीत सिंह गुलामीवाला सहित किसान मजदूर दशमेश यूनियन के नेता भी शामिल हुए।

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