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जस्टिस रोहित कपूर द्वारा अदालतों और सेंट्रल जेल का निरीक्षण, राष्ट्रीय लोक अदालत में 33,393 मामलों का बड़ा निपटारा

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 14 मार्च 2026: माननीय जस्टिस रोहित कपूर, जज पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट तथा प्रशासनिक जज, सेशन डिवीजन अमृतसर द्वारा आज अदालतों और सेंट्रल जेल अमृतसर का वार्षिक निरीक्षण किया गया।
दौरे के दौरान सेंट्रल जेल अमृतसर का विस्तार से निरीक्षण किया गया। इस मौके पर माननीय जस्टिस रोहित कपूर ने कैदियों की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए टेलीमेडिसिन सुविधा का उद्घाटन किया, जिसके माध्यम से बीमार कैदियों को डिजिटल माध्यम से चिकित्सकीय सलाह मिल सकेगी। जेल अस्पताल का भी निरीक्षण कर कैदियों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की गई। माननीय जस्टिस रोहित कपूर ने कैदियों से बातचीत की और उनकी शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना। संबंधित अधिकारियों को इन मुद्दों की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा जेल फैक्ट्री का भी निरीक्षण कर मशीनरी और कैदियों द्वारा की जा रही व्यावसायिक गतिविधियों की समीक्षा की गई।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए माननीय जस्टिस रोहित कपूर द्वारा जेल परिसर में एक पौधा भी लगाया गया और “हर एक व्यक्ति एक पौधा लगाओ” का संदेश दिया गया।
इसके बाद माननीय जस्टिस रोहित कपूर ने राष्ट्रीय लोक अदालत में पेश हुए मामलों के पक्षकारों से बातचीत की और उन्हें आपसी सहमति से विवादों के निपटारे के लिए प्रेरित किया। इस दौरान मिस अमन शर्मा, एडिशनल प्रिंसिपल जज, फैमिली कोर्ट अमृतसर की बेंच के समक्ष लंबित एक मामले को माननीय जस्टिस रोहित कपूर के व्यक्तिगत हस्तक्षेप से सफलतापूर्वक निपटाया गया। इसी प्रकार श्री पलविंदर सिंह, एसीजे (सीनियर डिवीजन), अजनाला की बेंच के समक्ष लंबित दो लोन रिकवरी मामलों, जिनकी कुल राशि 29 लाख रुपये थी, को लोक अदालत के दौरान 14 लाख रुपये में समझौते के साथ निपटाया गया। एक अन्य लोन मामला जिसकी राशि 14 लाख रुपये थी, माननीय जस्टिस रोहित कपूर के हस्तक्षेप से 4 लाख रुपये में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के साथ निपटाया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर सेशन डिवीजन अमृतसर में कुल 46 बेंचों का गठन किया गया। इनमें से 37 बेंच अमृतसर मुख्यालय पर बनाई गईं, जिनमें 35 न्यायिक अदालतों की बेंच, 1 इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल-कम-लेबर कोर्ट तथा 1 परमानेंट लोक अदालत (पीयूएस) की बेंच शामिल थी। इसके अतिरिक्त 5 बेंच अजनाला और 4 बेंच बाबा बकाला साहिब में बनाई गईं। कुल 35,049 मामलों में से 33,393 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया।
लोक अदालत के दौरान कई महत्वपूर्ण मामलों का भी निपटारा किया गया। फैमिली कोर्ट अमृतसर में वर्ष 2022 से लंबित एक भरण-पोषण मामले का 7,09,000 रुपये की अदायगी के साथ निपटारा हुआ, जिससे मुख्य केस सहित पांच संबंधित एग्जीक्यूशन याचिकाओं का भी निपटारा हो गया।
इसके अलावा “आईसीआईसीआई बैंक वर्सिस कंचन शिंगारी” नामक मामला, जो वर्ष 2018 से श्री अमनदीप सिंह घुमन, सिविल जज (जूनियर डिवीजन)-कम-जेएमआईसी, अमृतसर की अदालत में लंबित था और जिसमें 2.20 करोड़ रुपये के चेक का विवाद था, लोक अदालत के दौरान समझौते के साथ निपटाया गया।
इसी प्रकार “पवन कुमार भाटिया वर्सिस ममता भाटिया (सीएस/772/2018)” नामक कब्जे से संबंधित सिविल मामला, जो वर्ष 2018 से डॉ. गुरदर्शन सिंह, सिविल जज (जूनियर डिवीजन), अमृतसर की अदालत में लंबित था, भी समझौते के साथ निपटाया गया।
एक अन्य प्रेरणादायक मामले में मिस प्रियंका शर्मा, सीजेजेडी-कम-जेएमआईसी, अमृतसर की अदालत में लंबित वैवाहिक विवाद का निपटारा हुआ, जिसमें पति-पत्नी जो पिछले 12 वर्षों से अलग रह रहे थे, लोक अदालत के दौरान समझौते के साथ दोबारा साथ रहने के लिए राजी हो गए और अपने बच्चों सहित खुशी-खुशी अपने घर लौट गए।
इस निरीक्षण और राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में मिस जतिंदर कौर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमृतसर; श्री बलजिंदर सिंह, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश; मिस परमिंदर कौर बैंस, एसीजेएम; मिस सुप्रीत कौर, सीजेएम; तथा श्री अमरदीप सिंह बैंस, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अमृतसर सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों और स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा। दौरे के दौरान माननीय जस्टिस रोहित कपूर ने सेशन डिवीजन अमृतसर के सभी न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए न्याय प्रणाली की कुशल कार्यप्रणाली, मामलों के समय पर निपटारे तथा लोक अदालतों के माध्यम से समझौते को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया।
इसके बाद माननीय जस्टिस रोहित कपूर ने लर्नेड जिला एवं सत्र न्यायाधीश और अन्य वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के साथ अजनाला कोर्ट कॉम्प्लेक्स का दौरा किया और अदालत परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अजनाला बार एसोसिएशन के सदस्यों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए। इस अवसर पर ई-मुलाकात सुविधा का भी उद्घाटन किया गया, जिससे वकीलों को जेलों में बंद अपने मुवक्किलों से डिजिटल माध्यम के जरिए संपर्क करने में सुविधा मिलेगी। यह दौरा न्यायिक ढांचे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा के साथ संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य न्याय प्रणाली को और मजबूत करना तथा मुकदमेबाजों, वकीलों और कैदियों के लिए सुविधाओं में सुधार लाना है।

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