आप्रेशन सिंदूर में जवानों की मदद करने वाले सरपंच को किया गया सस्पेंड, सांसद औजला ने सरकार पर उठाए सवाल

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 17 जनवरी 2026: सांसद गुरजीत सिंह औजला ने आज अटारी के सरपंच हरप्रीत सिंह को सस्पेंड करने की निंदा करते हुए भ्रष्ट अफसरों पर निशाना साधा। हरप्रीत सिंह अकेले ऐसे सरपंच हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए आप्रेशन सिंदूर के दौरान जवानों की सेवा की और बीएसएफ ने हरप्रीत सिंह को सम्मानित भी किया था।
आज पूरी पंचायत के साथ सांसद औजला ने सरकार को घेरते हुए कहा कि पिछले दिनों बिना किसी कारण के हरप्रीत सिंह को सस्पेंड कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो मुख्यमंत्री लोकतंत्र की बात करते हैं दूसरी तरफ काम करने वाले ईमानदार इंसान को सजा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सिख वारियर शाम सिंह अटारी के गांव के सरपंच हरप्रीत सिंह को लोगों ने पार्टी बाजी से उपर उठकर जिताया था और मौजूदा सरकार का उम्मीदवार इस गांव से हार गया था। हरप्रीत सिंह ना सिर्फ अपनी लोकप्रियता से जीते थे ब्लकि उनके काम भी लोगों को पसंद आते हैं। उन्होंने कहा कि हरप्रीत सिंह के कामों को देखने के लिए आस-पास के गांवों के सरपंच भी आते हैं।
उन्होंने कहा यहां के विधायक और मौजूदा नेता इन पर दवाब बना रहे है कि या तो उनके साथ आए यां फिर उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि इनके गांव को एक रुपए की भी राज्य सरकार की ओर से ग्रांट नहीं दी गई सिर्फ केंद्र की ग्रांट मिली।
उन्होंने डीडीपीओ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह कितनी देर किसी पार्टी के अंडर काम करेंगें क्योंकि संविधान के मुताबिक उन्हें इसीलिए पद दिया जाता है कि वह सरपंचों को दिक्कत ना आने दें। उन्होंने कहा कि इस समय बहुमत इनके पास है लेकिन फिर भी झूठे मामले के तहत इन्हें सस्पेंड किया गया। उन्होंने कहा कि एक पैसे की भी गड़बड़ी नहीं हुई है चाहे तो इन्क्वायरी करवा ली जाए लेकिन फिर भी प्रशासन ने इस बात की भी परवाह नहीं की कि इन लोगों ने सरहद पर बैठकर फौज के साथ जंग को झेला है। इनकी बहादुरी के चलते ही शहरों में लोग सेफ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बहाना बनाकर लोकतंत्र से जुड़े हुए सरपंच को सस्पेंड कर दिया। उन्होंने कहा कि वोट लोकतंत्र में आजादी के तौर पर बिना किसी दवाब के नहीं डाली जा सकती।
उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद डीडीपीओ से बात की तो उन्होंने कहा कि वो मैटर देखेंगे। लेकिन फिर इन्हें कहा गया कि इन्होंने चिट्ठी रिसीव नहीं की जबकि सारे मते सेक्रेट्ररी की ओर डाले गए थे और सारा रिकार्ड उनके पास मौजूद है। उन्होंने कहा कि वो पीछे नहीं हटेंगे और डीडीपीओ, सेक्रेट्री और बीडीपीओ को पार्टी बनाया जाएगा और कोर्ट में मामला दर्ज करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट अफसरों के कारण ही काम रुकता है और वह अफसरों को चेतावनी देना चाहते हैं कि पार्टीबाजी से दूर रहें , क्योंकि कानून सबसे उपर आता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से भी मांग की कि इस मामले की इन्कव्यारी करवाई जाए और बहाल किया जाए और लोकतंत्र को खत्म ना किया जाए।

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