अमृतसर में कैंसर, प्रदूषण और भ्रष्ट सिस्टम पर बड़ा हमला – सांसद गुरजीत सिंह औजला ने उठाए गंभीर सवाल

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 8 अप्रैल 2026: अमृतसर में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामलों को लेकर सांसद गुरजीत सिंह औजला ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह स्थिति केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे बन चुके हैं कि लोग जिस पानी और खाने पर निर्भर हैं, वही उनके लिए जहर बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़े कारणों में पेस्टिसाइड का अत्यधिक इस्तेमाल, खाद्य पदार्थों में मिलावट और पानी में यूरेनियम व अन्य जहरीले तत्वों की बढ़ती मात्रा शामिल है। किसानों को सही तरीके से पेस्टिसाइड के उपयोग की जानकारी नहीं दी जा रही, जो एग्रीकल्चर विभाग की बड़ी विफलता है। वहीं बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थ खुलेआम बिक रहे हैं, जिससे लोगों की सेहत लगातार बिगड़ रही है।
सांसद औजला ने कहा कि तुंग ढाब ड्रेन का मुद्दा वह पिछले 8 वर्षों से लगातार उठाते आ रहे हैं, लेकिन आज तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उन्होंने बताया कि मानावाला में नई ड्रेन बनाई जा रही है, लेकिन वहां भी डेयरियों, केमिकल और अन्य गंदे पानी का प्रवाह जारी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कोई भी विभाग मिलकर काम नहीं कर रहा। पॉल्यूशन विभाग, एग्रीकल्चर विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बदतर होते जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि गुरु राम दास जी की पवित्र नगरी, जहां के सरोवरों को आस्था और श्रद्धा का केंद्र माना जाता है, आज प्रशासन की ढिलाई और सरकारों की नाकामी के कारण प्रदूषण की मार झेल रही है। पवित्र सरोवरों की धरती पर कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या बेहद दुखद और चिंताजनक है।
सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि सरकारों का पूरा तंत्र लोगों का जीवन स्तर सुधारने के लिए बनाया गया है, लेकिन आज यह तंत्र भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। अधिकारियों को लगता है कि वे इस स्थिति से बच जाएंगे, लेकिन इसका असर हर किसी पर पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर खाद्य पदार्थों में मिलावट हो रही है तो इसकी जिम्मेदारी जिला स्वास्थ्य अधिकारी और फूड सेफ्टी विभाग की है, और यदि प्रदूषण बढ़ रहा है तो इसके लिए पॉल्यूशन विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदार है।उन्होंने कहा कि हर विभाग मौजूद है, कानून भी बने हुए हैं, लेकिन जमीन पर काम नहीं हो रहा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अधिकारियों और विप्रशासन से सवाल करें, क्योंकि प्रशासन और अधिकारी भी जनता के नौकर हैं और उन्हें जवाब देना होगा।औजला ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधि अपने स्तर पर लगातार आवाज उठा रहे हैं। दिशा (DISHA) कमेटी की बैठकों में कई बार इन मुद्दों को उठाया गया और रिपोर्ट सरकार को भेजी गई, लेकिन कभी भी जवाबदेही तय नहीं की गई। अधिकारियों की लापरवाही और अनदेखी के कारण ही आज हालात इतने खराब हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुछ ईमानदार अधिकारी और नेता ही सिस्टम को किसी तरह चला रहे हैं, वरना स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।उन्होंने अमृतसर के दबुर्जी, टांगरा पुल ओर अन्य पुलों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इन प्रोजेक्ट्स में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है। दबुर्जी पुल पहले ही बैठ चुका है और टांगरा वाला पुल भी गंभीर खामियों से ग्रस्त है। उन्होंने कहा कि जब ये पुल बन रहे थे, तब भी प्रोजेक्ट डायरेक्टर को बार-बार कमियों के बारे में बताया गया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज स्थिति यह है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी और संबंधित विभागों की होगी।उन्होंने कहा कि वह इस मामले को आखिरी पड़ाव तक लेकर जाएंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ हर लड़ाई लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से भी सवाल किया कि आखिर इन गंभीर मुद्दों पर सरकार की क्या जवाबदेही है।अंत में उन्होंने हाल ही के एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि गगनदीप सिंह रंधावा से जुड़े केस में आरोपी लालजीत सिंह भुल्लर की गिरफ्तारी हो चुकी है और लेकिन इसके बावजूद अब तक आरोपी का मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर संकेत करती है और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।अंत में गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि यह समय है जब सरकार और प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।

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