खून से सनी छत से उम्रकैद तक: सत्र न्यायालय, अमृतसर ने हत्या के मामले में आरोपी को दोषी ठहराया

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 9 अक्टूबर 2026: परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित एक महत्वपूर्ण फैसले में माननीय सत्र न्यायाधीश श्रीमती जतिंदर कौर, अमृतसर की अदालत ने हत्या के एक मामले में धर्मिंदर कुमार ढाढी उर्फ छोटू को दोषी करार देते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा, साक्ष्य मिटाने के आरोप में धारा 201 IPC के तहत अलग सजा भी सुनाई गई है।

घटना की कहानी
यह मामला 11 और 12 अगस्त, 2020 की मध्यरात्रि का है, जब राज कुमार नामक 37 वर्षीय मजदूर की हत्या कर दी गई थी। वह मकबूलपुरा, अमृतसर के फोकल प्वाइंट स्थित राम किरपा इंडस्ट्रीज, फैक्टरी नंबर 367 में काम करता था।
राज कुमार और आरोपी एक ही फैक्टरी में काम करते थे और फैक्टरी की पहली मंजिल पर रहते थे। 12 अगस्त, 2020 की सुबह मृतक के भतीजे दिनेश कुमार ने अपने चाचा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। संपर्क नहीं होने पर वह उनका पता लगाने के लिए फैक्टरी पहुंचा।
वहां उसे पता चला कि राज कुमार काम पर नहीं आया था और आरोपी भी अनुपस्थित था। जब दिनेश कुमार छत पर पहुंचा, जहां उसका चाचा सोया करता था, तो उसने फर्श पर खून बिखरा हुआ देखा। इससे किसी गंभीर अपराध की आशंका पैदा हुई।

हत्या का कथित कारण: बार-बार होने वाले झगड़े
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी और मृतक के बीच तनावपूर्ण संबंध होने के साक्ष्य सामने आए। फैक्टरी के मालिक विनोद सचदेवा ने गवाही दी कि घटना से लगभग 12–13 दिन पहले राज कुमार ने उनसे शिकायत की थी कि आरोपी उसे परेशान करता था और गालियां देता था। इसके बाद फैक्टरी मालिक ने आरोपी को बुलाकर ऐसा व्यवहार दोबारा नहीं करने की सलाह दी थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों मजदूरों के बीच चल रहे विवाद के कारण हत्या की घटना हुई।

जांच और महत्वपूर्ण साक्ष्य
थाना मकबूलपुरा, अमृतसर में 12 अगस्त, 2020 को एफआईआर नंबर 262 दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। फोरेंसिक टीम ने छत से खून से सनी मिट्टी एकत्र की और जांच अधिकारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए खुलासे और उसके बाद की कार्रवाई के आधार पर राज कुमार का शव तथा लोहे की एक चपटी रॉड अमृतसर के तरनवाला पुल के पास नहर किनारे झाड़ियों से बरामद की गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण कई चोटों के चलते सिर पर लगी गंभीर चोट बताया गया। चिकित्सकीय साक्ष्यों ने इस निष्कर्ष का समर्थन किया कि ये चोटें हमले के दौरान लगी थीं।
अभियोजन पक्ष ने गवाहों, जांच अधिकारी, चिकित्सकीय विशेषज्ञ और अन्य गवाहों के बयान एवं साक्ष्य पेश किए। अदालत ने फैसला सुनाने से पहले रिकॉर्ड पर मौजूद सभी परिस्थितियों और साक्ष्यों का मूल्यांकन किया।

अदालत के निष्कर्ष
इस मामले में हत्या की वास्तविक घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था और मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। साक्ष्यों और परिस्थितियों की पूरी कड़ी की जांच करने के बाद अदालत ने आरोपी को राज कुमार की हत्या करने तथा स्वयं को कानूनी सजा से बचाने के इरादे से साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया।
अदालत ने हत्या के पीछे के उद्देश्य के मुद्दे पर भी विचार किया और कहा कि यदि उद्देश्य निर्णायक रूप से साबित न भी हो, तो इससे अभियोजन का मामला अनिवार्य रूप से कमजोर नहीं हो जाता, बशर्ते अन्य सिद्ध परिस्थितियों की कड़ी पूर्ण हो और आरोपी के दोषी होने की ओर स्पष्ट संकेत करती हो।

सुनाई गई सजा
अदालत ने निम्नलिखित सजाएं सुनाईं:
धारा 302 आईपीसी: उम्रकैद और 10,000 रुपये का जुर्माना। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दो वर्ष की अतिरिक्त कठोर कैद भुगतनी होगी।
धारा 201 आईपीसी: तीन वर्ष की कठोर कैद और 2,000 रुपये का जुर्माना। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दो महीने की अतिरिक्त कठोर कैद भुगतनी होगी।
दोनों मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी। यदि दोषी पहले ही कोई अवधि हिरासत में बिता चुका है, तो अदालत के निर्देशों के अनुसार उस अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
यह फैसला माननीय सत्र न्यायाधीश श्रीमती जतिंदर कौर, अमृतसर द्वारा 9 अक्टूबर, 2026 को सुनाया गया।

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