पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ शक्ति होती है कम और पर्यावरण होता है प्रदूषित
बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर किसान कमा सकते हैं अतिरिक्त आय
कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 15 अक्टूबर 2026: डिप्टी कमिश्नर श्री दलविंदरजीत सिंह ने जिले के किसानों से धान की पराली न जलाने की अपील करते हुए कहा कि पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ शक्ति कम होती है, मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और पर्यावरण प्रदूषित होता है। पराली जलाने से निकलने वाले जहरीले धुएं का बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय खेतों में ही मिलाने को प्राथमिकता दें। उन्होंने बताया कि एक टन पराली जलाने से लगभग 400 किलोग्राम जैविक कार्बन, 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश और 1.2 किलोग्राम सल्फर का नुकसान होता है। इसलिए भूमि की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने और पर्यावरण की रक्षा के लिए पराली का उचित प्रबंधन बेहद आवश्यक है।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि किसान बेलर मशीन की सहायता से पराली की गांठें बनाकर उन्हें बेच सकते हैं और अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को पराली को अनावश्यक बोझ समझने के बजाय इसे आय के एक संभावित स्रोत के रूप में देखना चाहिए। इसके अतिरिक्त, पराली का उपयोग पशुओं के सूखे चारे के रूप में भी किया जा सकता है।
उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने से परहेज करें तथा इसका उचित प्रबंधन करके पर्यावरण की शुद्धता, मिट्टी की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।

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