2007 से 2017 के अकाली-भाजपा शासन में जड़ पकड़ चुके नशे के कोढ़ के लिए भाजपा जवाबदेह बने

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 20 अक्टूबर 2026: आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर पूरे देश में नशा तस्करी पर लगाम लगाने में विफल रहने तथा राजनीतिक लाभ के लिए पंजाब की नशे के खिलाफ लड़ाई का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। धालीवाल ने कहा कि पंजाब को नशे के कोढ़ पर उपदेश देने से पहले अमित शाह को उन राज्यों में भाजपा के अपने रिकॉर्ड का जवाब देना चाहिए जहां वह सत्ता में है, और यह स्पष्ट करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पंजाब में नशे व हथियारों के प्रवेश को रोकने के लिए केंद्र ने क्या किया है।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या की जांच पीड़ित परिवार की मांग पर सीबीआई को सौंपने के मुख्यमंत्री भगवंत मान के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए धालीवाल ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि जांच से यह स्थापित हो सके कि इस हत्या के पीछे कौन-सी ताकतें थीं। उन्होंने कहा कि यह घटना पंजाब में एक बड़ा मुद्दा बन गई है क्योंकि मान सरकार पिछले तीन वर्षों से नशे के खिलाफ लगातार युद्ध लड़ रही है, हजारों तस्करों को गिरफ्तार कर जेलों में भेज रही है और नशा तस्करी से जुड़ी संपत्तियों को ध्वस्त कर रही है।
धालीवाल ने अमित शाह के पंजाब दौरे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि वह राजनीतिक भाषणों के अलावा राज्य के लिए क्या लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने पहले भी पंजाब में भाजपा के नशा विरोधी अभियान में हिस्सा लिया था, लेकिन वह रैली पार्टी द्वारा दावा की गई भीड़ को जुटाने में नाकाम रही थी। उन्होंने चुनौती देते हुए पूछा, “अमित शाह जी, आपका पंजाब में स्वागत है, लेकिन क्या आप हमें बता सकते हैं कि आप पंजाब के लिए क्या लेकर आए हैं?” इसके साथ ही उन्होंने भाजपा से राज्य की नशे के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान स्पष्ट करने को कहा।
धालीवाल ने कहा कि आज पंजाब जिस नशे की समस्या से जूझ रहा है, उसकी जड़ें 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान जमी थीं। उन्होंने कहा, “आपकी सरकार के दौरान ही पंजाब में ‘चिट्टा’ (नशा) शब्द व्यापक रूप से चर्चित हुआ था। जब आपकी सरकार सत्ता में थी, तब लोगों को पता चला कि चिट्टा क्या होता है।” इसके साथ ही उन्होंने इस दौरान नशे के कारोबार पर रोक लगाने में विफल रहने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने अमित शाह को चुनौती दी कि वे अपने हेलीकॉप्टर में उन अकाली नेताओं को साथ लेकर आएं जो कथित तौर पर नशे के कारोबार में शामिल थे। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा गुटका साहिब की सौगंध खाने के बावजूद उसके पांच साल के कार्यकाल में कितने नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया था?
धालीवाल ने कहा कि कांग्रेस और अकाली दल ने वोट हासिल करने के लिए बार-बार नशे के मुद्दे का इस्तेमाल किया है, लेकिन अपने वादे पूरे करने में नाकाम रहे हैं। इसके विपरीत, भगवंत मान सरकार ने नशा तस्करों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की है और केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय ज़मीनी स्तर पर इस कोढ़ से लड़ रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में अमित शाह पर सीधा निशाना साधते हुए धालीवाल ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से नशे और हथियार लाने वाले ड्रोन को रोकने में केंद्र की विफलता पर सवाल उठाए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि पंजाब की पाकिस्तान के साथ 532 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जिसके पार से ड्रोन लगातार नशे और हथियार लेकर आ रहे हैं।
धालीवाल ने याद दिलाया कि केंद्र ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को पंजाब के भीतर 50 किलोमीटर तक बढ़ाने के लिए संसद में कानून बनाया था, और यह तर्क दिया था कि नशे तथा हथियारों की तस्करी रोकने के लिए यह कदम जरूरी है। उन्होंने पूछा, “आपने कहा था कि नशे और हथियारों की घुसपैठ रोकने के लिए बीएसएफ को लगभग 50 किलोमीटर सीमावर्ती क्षेत्र की जिम्मेदारी दी जा रही है। हमें बताइए, क्या आपने सीमा पर तैनात बीएसएफ जवानों को एंटी-ड्रोन सिस्टम उपलब्ध कराए हैं? क्या आपने कभी जाकर उनसे पूछा है कि ये ड्रोन सीमा पार से कैसे आ रहे हैं?”
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने तीन एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने के लिए अपने कोष से 50 से 52 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन राज्य की लंबी सीमा को देखते हुए इससे कहीं बड़े सहयोग की आवश्यकता थी। धालीवाल ने कहा, “यदि बीएसएफ के तहत आने वाला 50 किलोमीटर का क्षेत्र केंद्र के अधिकार में आता है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? अमित शाह जी, सीमा को पूरी तरह सील करने में विफल रहने के लिए आप सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। यह आपकी और आपकी सरकार की नाकामी है।”
उन्होंने मांग की कि सीमा की प्रभावी सुरक्षा की मांग करने वाली इस गंभीर समस्या के लिए पंजाब को जिम्मेदार ठहराने के बजाय केंद्र यह स्पष्ट करे कि उसने नशे और हथियारों के प्रवाह को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं। पंजाब को उपदेश देने से पहले भाजपा को गुजरात, हरियाणा और राजस्थान की तरफ देखना चाहिए।
धालीवाल ने भाजपा पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने शासित राज्यों में नशा तस्करी पर नियंत्रण पाने में नाकाम रहने के बावजूद पंजाब को निशाना बना रही है। उन्होंने सवाल किया कि अमित शाह गुजरात क्यों नहीं जा रहे हैं ताकि अडानी द्वारा संचालित मुंद्रा पोर्ट सहित विभिन्न बंदरगाहों से नशे की बरामदगी पर ध्यान दिया जा सके, या हरियाणा क्यों नहीं जा रहे हैं जहां खुलेआम नशा उपलब्ध है और गैंगस्टर गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा, “पंजाब आने से पहले अमित शाह जी को गुजरात और हरियाणा जाना चाहिए था। आपको उस बंदरगाह पर जाना चाहिए था जहां कंटेनरों में टन के हिसाब से नशा आता है, और हरियाणा जाना चाहिए था जो गैंगस्टरों की राजधानी बन चुका है।”
उन्होंने दिल्ली में भाजपा के रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वहां पार्टी के सत्ता में आने के बाद पिछले दो वर्षों में नशे की समस्या और अधिक विकराल हो गई है। उन्होंने भाजपा पर स्कूली बच्चों तक नशे की पहुंच बनने देने का आरोप लगाया और उसके शासन वाले राज्यों की स्थिति पर जवाबदेही की मांग की।
धालीवाल ने मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा पर केंद्र के रुख पर भी सवाल खड़े किए और पूछा कि भाजपा सरकार ने वहां के लोगों की रक्षा के लिए क्या किया है? उन्होंने कहा कि भाजपा दुखद घटनाओं का राजनीतिकरण करने पंजाब पहुंचकर अपने शासन की विफलताओं से जुड़े सवालों से बच नहीं सकती।
धालीवाल ने कहा कि अमित शाह और अन्य विपक्षी नेता व्यावहारिक समाधान पेश करने के बजाय नशे से प्रभावित लोगों की मौतों पर राजनीतिक रोटियां सेकने की कोशिश कर रहे हैं।
धालीवाल ने पंजाब का फंड रोकने के लिए भी केंद्र की कड़ी आलोचना की और याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल की बाढ़ के बाद बाढ़ राहत के लिए 1,600 करोड़ रुपये का ऐलान किया था, लेकिन राज्य को 1 रुपया भी नहीं मिला।
उन्होंने केंद्र पर पंजाब को उसके पानी और विश्वविद्यालयों से वंचित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया, जबकि राज्य की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक सहयोग देने में वह पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने पूर्व कांग्रेसी नेताओं, जो अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं, के इस राजनीतिक अभियान में शामिल होने पर भी सवाल उठाए और पूछा कि उन्होंने सत्ता में रहने के दौरान क्या हासिल किया था तथा नशे को खत्म करने के अपने वादे क्यों पूरे नहीं किए?
धालीवाल ने कहा, “पंजाब को अमित शाह के हेलीकॉप्टर में आकर लाशों पर राजनीति करने की कोई जरूरत नहीं है। यदि आपके पास पंजाब के लिए कोई दृष्टिकोण है, तो हमें बताइए कि वह क्या है। यदि आपने पंजाब के लिए कुछ किया है, तो लोगों को बताएं कि आपने क्या दिया है।”
उन्होंने कहा कि मान सरकार ने नशा तस्करों को गिरफ्तार करके, नशा तस्करी से जुड़ी संपत्तियों को ध्वस्त करके और इसमें लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करके अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण दिया है। उन्होंने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे भाजपा के इस वादे से गुमराह न हों कि यदि उन्हें मौका दिया गया तो वे नशे को खत्म कर देंगे, और इसके लिए उन्होंने दिल्ली की मौजूदा स्थिति को एक चेतावनी के रूप में सामने रखा।
धालीवाल ने कहा, “पंजाब ने देश की आजादी में बहुत बड़ा योगदान दिया है, लेकिन पिछले 12-13 वर्षों में भाजपा ने पंजाब को क्या दिया है? पंजाब के लोग इस राजनीति को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। हमें भाजपा, आरएसएस के एजेंडे और कांग्रेस से सचेत रहने की जरूरत है, जिन्होंने अतीत में पंजाब को सिर्फ निराश ही किया है।”

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