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मोदी सरकार किसान नेताओं को तुरंत बातचीत का बुलावा दे कर काले कानून रद्द करे: बाबा जसपाल सिंह

कल्याण केसरी न्यूज़ मानावाला / अमृतसर 8जून : खेती कानूनों को ले कर केंद्र सरकार ख़िलाफ़ जारी किसान संघरश की कामयाबी के लिए संतों महांपुरशें के सहयोग के साथ सिक्ख संगतें की तरफ से श्री गुरू ग्रंथ साहब जी के सहज पाठों की लड़ी की आरंभता की गई है।
गाँव वडाली डोकरें में टी रोड पर स्थित श्री गुरु रामदास लंगर हाल में सहज पाठों की लड़ी की आरंभता की अरदास संत बाबा अवतार सिंह जी प्रमुख दल बाबा बिधीचन्द सुर सिंह वालों की तरफ से गई और पाठों की आरंभता श्री दरबार साहब के ग्रंथि सिंह साहब ज्ञानी बलविन्दर सिंह जी की तरफ से गई। इलाको के लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस बारे पत्रकारों के साथ बातचीत करते भाई इकबाल सिंह तुंग और पिरो: सरचांद सिंह ख्याला ने बताया कि केंद्र ख़िलाफ़ किसानी संघरश एक अहम पड़ाव पर पहुंच उठवा है। अपने मिशन की बात करते उन्होंने कहा कि हक हकूक के लिए संघरश कर रहे किसान मोर्चे को मज़बूती प्रदान करन के लिए गुरू साहब का ओट आसरा लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिक्ख जत्थेबंदियाँ संप्रदायों, समूह संगतें इलाका निवासियों के इलावा ब्रह्म ज्ञानी संत बाबा झंडा सिंह जी, संत बाबा बिसन सिंह जी बाबा चन्नण सिंह जी खटिया साहब कारसेवा वालों की तरफ से वरोसाए सेवक संत बाबा जसपाल सिंह जी गूह: चमरंग रोड के विशेश योगदान के साथ दो सहज पाठों की लड़ी किसानी संघरश की फतहयाबी तक निरंतर चलाई जायेगी और खेती कानूनों के ख़िलाफ़ हर मुहाज़ पर लड़ाई लड़ रहे किसानों के मनोबल को चढ़दीकला में बनाई रखने के लिए गुरू आगे अरदास विनती की जायेगी। उन कहा कि गुरबानी के प्रचार प्रसार साथ साथ किसानी संघरश के हक में आम लोगों पर नौजवानों को गाँव गाँव जा कर भी लामबंद किया जायेगा।

नेताओं ने कहा कि सरकारों की असीमित जबर ज़ुल्म के बावजूद किसान संघरश में पंजाब और सिक्ख भाईचारे की तरफ से निभाई जा रही ठोस भूमिका ने देश विदेस के लोगों में सिक्ख किरदार की शनाख़त कराई है।उन्होंने मोदी सरकार की तरफ से देश के किसानों के हित बड़े कॉर्पोरेट घरानों आगे गहने रखने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि नये खेती कानूनों के लागू होने साथ इस का बुरा प्रभाव किसान पर ही नहीं बल्कि आढ़तिये, खेत मज़दूर और छोटे कारोबारी लोगों पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एम यह पी और स्थापित मंडीकरण प्रणाली का अंत होने साथ किसानी तबाह हो जायेगी। किसानी की तबाही निश्चित रूप से मुल्क की तबाही है। उन्होंने अफ़सोस प्रकट करते कहा कि भारत कहने को तो लोकतंत्र देश है परन्तु यहाँ पिछले एक साल से सड़कें पर उतर कर शांतमयी संघरश कर रहे किसानों की आवाज़ तक नहीं सुनी जा रही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को किसानों की भावनायों का सम्मान करना चाहिए और किसानी मामला हल करन के लिए तुरंत किसान नेताओं को बुला कर बातचीत करते काले कानून रद्द कर देने चाहिएं। उन्होंने राज सरकारें को भी केंद्र की तरफ से राज्यों के संघी और संवैधानिक अधिकारों के किये जा रहे जा रहे हनन प्रति मूक दरशक बने न रहना के लिए कहा। इस मौके संत बाबा जसपाल सिंह खटिया साहब कारसेवा, भाई इकबाल सिंह तुंग, पिरो: सरचांद सिंह और बाबा सतनाम सिंह अकाली की तरफ से संत बाबा अवतार सिंह सुर सिंह वाले, सिंह साहब ग्यानी बलविन्दर सिंह, संत बाबा सज्जन सिंह गुरू कर बेर साहब, बाबा लायक सिंह तरना दल, भायी बलदेव सिंह वडाला समेत आए मुहतबरें को सिरोपाउ दे कर सम्मानित किया गया। इस मौके किसान संघरश समिति पंजाब के ज़िला प्रधान दविन्दर सिंह चाटीविंड, किसान यूनियन (राजेवाल) के सीनियर मित्र प्रधान सुखराम सिंह लुहारका, तरसेम सिंह खालसा भिक्खीविंड, लंगर साहब सोसायटी के प्रधान स: नरिन्दर सिंह वडाली डोगरें, बाबा हिंमत सिंह धर्मशाला से लखबीर सिंह और गुरबीर सिंह लाली, बाबा सुलक्खण सिंह गुरू वाली, ज्ञानी सुरजण सिंह, नौजवान सकती दल के प्रधान जगतार बॉक्सर, सरपंच बलबीर सिंह, सरपंच सुखराज सिंह मानावाला, कामगार किसान यूनियन के नेता अक्सर सिंह थोथी, सतबीर सिंह बजाज, दीदार सिंह, सरपंच संतोख सिंह, बलदेव सिंह चाटीविंड, गुरविन्दर सिंह चाटीविंड, संतोख सिंह वडाली, बलविन्दर सिंह, लखबीर सिंह, परमजीत सिंह चाटीविंड, गुरसाहब सिंह चाटीविंड, मंगल सिंह रामपुरा, बलबीर सिंह वडाली और ओर विश्वसनीय मौजूद थे।

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