कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 16 सितंबर 2025: साल 2025 की धान की कटाई शुरू होते ही ज़िला प्रशासन ने धान की पराली जलाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। प्रशासन ने कहा है कि पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो रही है, धुएं के कारण प्रदूषण फैल रहा है और खेतों के किनारे लगे पेड़ जल रहे हैं।
रोहित गुप्ता, अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट, अमृतसर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह आदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद जीवाणु और पोषक तत्व, जो फसल के लिए लाभदायक होते हैं, नष्ट हो जाते हैं जिससे ज़मीन की उपजाऊ शक्ति कम होती है।
इसके अलावा, पराली जलाने से सड़कों के आसपास धुंध फैलती है जिससे आवागमन में बाधा आती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। कई बार इससे गांवों में आपसी झगड़े भी हो जाते हैं, जिससे सीधे तौर पर किसानों को नुकसान होता है और इसका अप्रत्यक्ष असर देश के उत्पादन पर भी पड़ता है।
इसी कारण, ज़िले में पराली जलाने से रोकने के लिए उन क्षेत्रों में जहां बेलिंग नहीं होती, वहां धान की कटाई के समय कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ एसएमएस/सुपर एसएमएस मशीन का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा।
यह आदेश एकतरफा रूप से मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया है और सार्वजनिक हित में जारी किया गया है। यह आदेश 15 सितंबर 2025 से 14 नवंबर 2025 तक प्रभावी रहेगा।
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