अजनाला के सात गांवों में कार्ड बनाने का कार्य हुआ शुरू

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 29 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री पंजाब सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि राज्य के प्रत्येक नागरिक का 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कार्ड बिना किसी भेदभाव के बनाया जाएगा और अब किसी भी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार को इलाज के लिए कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इन शब्दों का प्रकटाव अजनाला विधानसभा क्षेत्र के विधायक सरदार कुलदीप सिंह धालीवाल ने अपने हलके के गांव घुक्केवाली, भख्खाहारी सिंह, गुज्जरपुरा, कलोमहल, वार्ड नंबर 6 रामदास, दयाल भड़ंग और चमियारी में कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी) द्वारा लोगों के स्वास्थ्य बीमा कार्ड बनाए जाने के कार्य का जायजा लेने के उपरांत किया।
सरदार धालीवाल ने कहा कि अजनाला हलके के सात गांवों में ये कैंप लगाए गए हैं और आने वाले दिनों में अन्य गांवों में भी ऐसे कैंप लगाकर लोगों के स्वास्थ्य बीमा कार्ड बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि कैंप से पहले प्रत्येक घर में पर्ची वितरित की जा रही है, जिसमें कार्ड बनवाने का समय और पूरा विवरण दिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन कैंपों में अवश्य पहुंचें ताकि अधिक से अधिक कार्ड बनाए जा सकें।
प्रेस से बातचीत करते हुए सरदार धालीवाल ने बताया कि इन सीएससी सेंटरों में कार्ड बनवाने के लिए किसी भी प्रकार की कोई पंजीकरण फीस नहीं ली जा रही है। पूरे परिवार के सदस्य एक साथ आकर अपने आधार कार्ड और वोटर कार्ड के माध्यम से यह कार्ड बनवा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को, जो इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, अपना आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड लाना अनिवार्य है। वहीं 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र आवश्यक होगा।
इस कार्ड के माध्यम से हृदय रोग, कैंसर, किडनी और लीवर की बीमारियों, गंभीर दुर्घटनाओं में लगी चोटों, बड़ी सर्जरी तथा लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने से संबंधित खर्च शामिल हैं। इससे किसी भी जाति या परिवार के मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब के लगभग 3 करोड़ नागरिकों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाएंगे, जिनके माध्यम से वे करीब 900 सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज करवा सकेंगे। इस योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये तक के इलाज से संबंधित सभी खर्च सीधे अस्पतालों और बीमा एजेंसी के बीच निपटाए जाएंगे, जिससे मरीजों को अपनी जेब से कोई भी राशि खर्च नहीं करनी पड़ेगी।
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