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अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर सांसद गुरजीत सिंह औजला का बड़ा बयान, कहा—किसानों और आम नागरिकों के हितों से समझौता बर्दाश्त नहीं


कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 12 फरवरी 2026: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने संसद के बाहर कांग्रेस नेताओं के साथ प्रदर्शन करते हुए कहा कि यह समझौता केवल एक आर्थिक करार नहीं है, बल्कि देश के किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। औजला ने आरोप लगाया कि इस डील में देश के अन्नदाताओं और मध्यम वर्ग के हितों को नजरअंदाज किया गया है, जो बेहद चिंताजनक है।सांसद औजला ने कहा कि सरकार को किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से पहले देश की आंतरिक आर्थिक स्थिति, कृषि क्षेत्र की मजबूती और छोटे उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने विदेशी दबाव और कॉर्पोरेट हितों को तरजीह दी है। उन्होंने कहा कि यदि इस डील के कारण कृषि उत्पादों के आयात में बढ़ोतरी होती है या घरेलू बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो इसका सीधा नुकसान भारतीय किसानों और छोटे कारोबारियों को उठाना पड़ेगा।औजला ने किसानों द्वारा दिए गए ‘भारत बंद’ के आह्वान को बढ़ती नाराजगी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि जब किसानों को अपनी बात मनवाने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है, तो यह सरकार की संवादहीनता को दर्शाता है। सरकार को टकराव की राजनीति छोड़कर किसान संगठनों से खुली और पारदर्शी बातचीत करनी चाहिए।उन्होंने बताया कि आज संसद भवन के मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराया और जनहित की आवाज बुलंद की। औजला ने कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है और यहां देशहित से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस ट्रेड डील के सभी प्रावधानों को सार्वजनिक किया जाए और संसद में विस्तृत बहस कराई जाए, ताकि देश की जनता को सच्चाई पता चल सके।सांसद औजला ने स्पष्ट कहा कि देश की नीतियां किसी भी विदेशी दबाव में नहीं बननी चाहिए। भारत एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र है, और यहां की आर्थिक नीतियां राष्ट्रीय हित, किसान सम्मान और आम जनता की भलाई को केंद्र में रखकर तय की जानी चाहिए।अंत में उन्होंने कहा कि यदि इस डील में किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के हितों की अनदेखी की गई है, तो विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा और जनहित की लड़ाई संसद से लेकर सड़क तक लड़ी जाएगी।

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