राज्य भर में 2.89 लाख से अधिक माताओं को मिली आर्थिक राहत: संधू

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 25 मार्च 2026: महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण को आम आदमी पार्टी की सरकार की पहली प्राथमिकता बताते हुए कहा गया है कि पंजाब सरकार गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की सेहत और भलाई सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए जिला योजना समिति अमृतसर के चेयरमैन गुरप्रताप सिंह संधू ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक 127.95 करोड़ रुपये की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे महिलाओं के बैंक खातों में जारी की गई है, जिससे महिलाओं को बिना किसी परेशानी के सहायता प्राप्त हुई है।
चेयरमैन गुरप्रताप सिंह संधू ने बताया कि इस अवधि के दौरान 2.89 लाख से अधिक महिलाओं को इस वित्तीय सहायता पहल का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि यह सहायता केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच भी है। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल से हजारों परिवारों में खुशी, भरोसा और सुरक्षा की भावना पैदा हुई है।
चेयरमैन संधू ने बताया कि इस योजना के तहत पहले बच्चे के लिए महिलाओं को दो किश्तों (3000 + 2000 रुपये) के माध्यम से कुल 5000 रुपये की राशि DBT के जरिए सीधे उनके खातों में दी जाती है। इसके अलावा, यदि दूसरा बच्चा लड़की हो, तो महिला लाभार्थी को एकमुश्त 6000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जो बेटी के जन्म को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गुरप्रताप सिंह संधू ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान 38.11 करोड़ रुपये की राशि 76,478 महिलाओं को दी गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान यह राशि बढ़कर 63.78 करोड़ रुपये हो गई, जिससे 1,43,418 महिलाओं को लाभ मिला। इसी तरह, वित्तीय वर्ष 2025-26 में (31 जनवरी 2026 तक) 26.06 करोड़ रुपये की राशि 69,110 महिलाओं के खातों में जारी की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा अधिक से अधिक महिलाओं को इस पहल से जोड़ने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान 1.32 लाख से अधिक महिलाओं का पंजीकरण किया गया था। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 1.14 लाख से अधिक महिलाओं का पंजीकरण किया गया। इसी तरह 2025-26 के दौरान कम से कम 1.14 लाख महिलाओं को पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 11 फरवरी 2026 तक 1.05 लाख महिलाओं का पंजीकरण किया जा चुका है और लक्ष्य के अनुसार शेष पंजीकरण के प्रयास जारी हैं।

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