
कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 21 फरवरी 2026: भाजपा सरकार की गोली से 21 फरवरी 2024 को दिल्ली किसान आंदोलन-2 के दौरान खनौरी बॉर्डर पर शहीद हुए शहीद शुभकरण सिंह बल्लो की दूसरी बरसी पर के.एम.एम. किसान मजदूर मोर्चा भारत द्वारा देशव्यापी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस अवसर पर नेताओं ने जानकारी देते हुए बताया कि आज राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, कारैकाल (पुडुचेरी), जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और पंजाब में लाखों किसानों, मजदूरों और महिलाओं ने एकत्र होकर शहीद शुभकरण सिंह तथा अधिकारों की लड़ाई में अपनी जान कुर्बान करने वाले अन्य शहीदों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
नेताओं ने कहा कि जहां भाजपा सरकार ने जनता के अधिकारों का हनन किया है, वहीं पंजाब की भगवंत मान सरकार ने भी शुभकरण सिंह की शहादत के मामले में पुलिस केस दर्ज करने के बाद कोई ठोस अगली कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि हमें शहीद शुभकरण सिंह की कुर्बानी को याद रखते हुए किसान आंदोलन को और अधिक मजबूती से लड़ने की आवश्यकता है, क्योंकि भारत सरकार जहां किसानों-मजदूरों को उनके अधिकार देने से इंकार कर रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृषि क्षेत्र के लिए घातक समझौते लागू कर रही है, जिनके तहत अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए पूरी तरह दरवाजे खोलने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 15 अगस्त को बयान देते हैं कि भारत के कृषि क्षेत्र को सुरक्षित किया जाएगा, लेकिन इसके तीन दिन बाद ही अमेरिकी कपास पर टैक्स समाप्त कर 30 लाख गांठ कपास अमेरिका से मंगवाई गई, जिससे भारतीय कपास के दामों में भारी गिरावट आई। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी अमेरिका के दबाव में काम कर रहे हैं और देश के किसानों-मजदूरों के अधिकारों को अमेरिका के सामने समर्पित कर रहे हैं।
नेताओं ने कहा कि बिजली बोर्ड के निजीकरण के लिए लाया जा रहा बिजली संशोधन बिल, बीज अधिनियम 2025, मजदूरों के श्रम कानूनों को खत्म कर लागू किए गए चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड), मनरेगा को समाप्त कर लाया गया वी.बी. ग्राम जी जैसे कानूनों के खिलाफ किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं को देश और पंजाब स्तर पर आने वाले बड़े आंदोलनों की तैयारी कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली आंदोलन-1 और 2 के दौरान हुई शहादतें व्यर्थ नहीं जाएंगी।
उन्होंने कहा कि आज के एकत्रों में यह संकल्प लिया गया कि जिस प्रकार मोदी सरकार, हरियाणा सरकार और भगवंत मान सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने के लिए इजरायली ड्रोन से आंसू गैस के गोले दागे गए, अर्धसैनिक बलों का प्रयोग किया गया और सीधी गोलियां चलाई गईं, तथा लोगों का हौसला न तोड़ पाने पर भगवंत मान सरकार द्वारा पुलिस बल का उपयोग कर केंद्र सरकार के खिलाफ चल रहे शंभू-खनौरी मोर्चे को हटाया गया — इन सब घटनाओं ने सरकारों का किसान-मजदूर विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है।
नेताओं ने कहा कि सरकारें यह समझ लें कि किसानों-मजदूरों को शहीद कर आंदोलन को रोका नहीं जा सकता, बल्कि यह आंदोलन और अधिक प्रचंड होगा।
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