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महाराष्ट्र का 53वां वार्षिक निरंकारी संत समागम नाशिक में स्वेच्छा सेवाओं का शुभारम्भ

कल्याण केसरी न्यूज़ होशियारपुर :महाराष्ट्र का 53 वां वार्षिक निरंकारी संत समागम नाशिक में परम पूज्य निरंकारी सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन सान्निध्य में 24, 25 एवं 26 जनवरी, 2020 को होने जा रहा है। नाशिक एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है और पिछले 52 साल से मुंबई में संपन्न होते आ रहे इस विशाल आध्यात्मिक समारोह का आयोजन पहली बार आयोजित करने का सौभाग्य नाशिक निवासीयों के हिस्से में आया है। मिशन का सत्य, प्रेम एवं एकत्व का संदेश जन मानस तक पहुंचाना इस समागम का मुख्य उद्देश्य है। स्मरण रहे कि महाराष्ट्र का पहला वार्षिक निरंकारी संत समागम 1 जनवरी, 1968 को मुंबई के प्रसिद्ध शिवा जी पार्क में मिशन के तत्कालीन प्रमुख बाबा गुरबचन सिंह जी के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ था।

समागम की तैयारियों के लिए स्वेच्छा सेवाओं का उद्घाटन संत निरंकारी मंडल के महासचिव ब्रिगेडियर (से.नि.) पूज्य श्री पी.एस.चीमा जी के कर कमलों द्वारा रविवार, दिनांक22दिसंबर, 2019 को सुबह 11.00 बजे निरंकारी संत समागम स्थल, ठक्कर ग्राउंड, बोरगड, मखमलाबाद, पेठ-धरमपुर गुजरात हायवे, नाशिक में किया गया। इस उद्घाटन समारोह का प्रारंभ एक प्रार्थना द्वारा हुआ जो इस समागम की सफलता के लिए सद्गुरु माता जी एवं निरंकार प्रभु के चरणों में की गई। इस अवसर पर समागम कमेटी के सदस्य, सेवादल अधिकारी एवं नाशिक एवं आसपास के इलाकों तथा मुंबई एवं महाराष्ट्र के अलग अलग स्थानों से हजारों निरंकारी श्रद्धालु भक्त उपस्थित थें। समागम क्षेत्र के म्हसरुळ पुलीस ठाणे के वरिष्ठ पुलीस निरीक्षक श्री पंढरीनाथ रघुनाथ ढोकणे भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

इस अवसर पूज्य श्री चीमा जी ने श्रद्धालु भक्तों का आह्वान किया कि वे बड़ी लगन और श्रद्धा से समागम की सेवाओं में अपना योगदान दें। आपने कहा कि संत निरंकारी मिशन प्यार का मिशन है और प्यार की भावना को बढ़ावा देकर मानव को मानव के साथ जोडऩे का कार्य करता है। आपने प्रतिपादन किया कि सबका परम पिता परमात्मा एक ही है  और मानव-मात्र उसकी संतान है। जब कोई परमात्मा से नाता जोडता है तो सभी के प्रति उसके मन में भ्रातृ भाव पैदा होता है।
स्वेच्छा सेवाओं का उद्घाटन होने के बाद निरंकारी सेवादल के स्वयं सेवक एवं बड़ी संख्या में निरंकारी भक्त संत समागम की तैयारियों में जुट गए। ये सेवादा भक्त नियोजनबद्ध तरिके से उनके लिए प्रदान की गई सेवाओं को निष्काम भाव से स्वेच्छा सेवा का एक अनोखा उदाहरण प्रस्तुत करते हुए निभायेंगे। कुछ ही हफ्तों में इन सेवाओं द्वारा समागम स्थल को टेन्टों एवं शामियानों की एक भव्य नगरी के रुप में परिवर्तित किया जायेगा जिसमें समागम के लिए आने वाले भक्तों के रिहाईश की व्यवस्थाओं के अलावा पानी, बिजली, जल नि:सारण, स्वच्छता गृह, लंगर, रियायती दरों में कैन्टीन इत्यादी व्यवस्थायें बनाई जायेगी।

समागम स्थल पर मुख्य कार्यक्रम का भव्य पण्डाल बनाया जायेगा जिसके आस-पास विभिन्न कार्यालय, प्रकाशन स्टाल, दवाखाने, निरंकारी प्रदर्शनी इत्यादी के शामियाने बनाये जायेंगे।
उल्लेखनीय है कि समागम के कार्यक्रम की पूरी योजना, डिजाईनिंग एवं क्रियान्वयन निरंकारी भक्तों द्वारा बनाई जाती है जिसे वे आशीर्वाद प्राप्त करने का मौका एवं अपना सौभाग्य समझते हैं।
संत समागम में पूरे महाराष्ट्र से, नजदिकी राज्य गुजरात से एवं भारत के अन्य भागों तथा दूर देशों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु भक्त भाग लेंगे। समागम के उपरान्त दिनांक 27 जनवरी, 2020 को समागम स्थल पर ही करीब 100 जोड़ों का सामूहिक विवाह समारोह परम पूज्य सद्गुरु माता जी की पावन सान्निध्य में संपन्न होगा

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