राष्ट्रीय लोक अदालत अमृतसर में 35,031 मामलों का निपटारा,  लगभग 99.80 करोड़ रुपये की रिकवरी

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 12 सितंबर 2026 : पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, एस.ए.एस. नगर के दिशा-निर्देशों एवं मार्गदर्शन के तहत जिला अमृतसर में 12 सितंबर, 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया। इस लोक अदालत का आयोजन माननीय श्रीमती जतिंदर कौर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-चेयरपर्सन, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, अमृतसर की अगुवाई में किया गया। लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को त्वरित, सस्ता एवं आपसी सहमति के आधार पर न्याय प्रदान करना था।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत में श्री परिंदर सिंह, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश; श्री महेश कुमार शर्मा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश; श्रीमती अमन शर्मा, अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय; तथा श्रीमती राजविंदर कौर, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-कम-पीठासीन अधिकारी, औद्योगिक ट्रिब्यूनल द्वारा पीठों की अध्यक्षता की गई। इसके अलावा जिला अदालत अमृतसर में 22 लोक अदालत पीठों, बाबा बकाला साहिब में 2 पीठों तथा अजनाला में 3 पीठों का गठन किया गया, जिससे जिले के अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सका।

राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता में श्री अमरदीप सिंह बैंस, सचिव, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, अमृतसर द्वारा की गई सुव्यवस्थित योजना, समन्वय एवं निरंतर प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर समस्त न्यायिक अधिकारियों, वकील समुदाय, बैंकों, बीमा कंपनियों, विभिन्न सरकारी विभागों, न्यायालय के कर्मचारियों, पैरा लीगल वालंटियर्स तथा मुकदमेबाजों के सहयोग से यह लोक अदालत अत्यंत सफल रही।

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कुल 38,247 मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया, जिनमें से 35,031 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल ₹99,80,22,793/- (निन्यानवे करोड़ अस्सी लाख बाईस हजार सात सौ तिरानवे रुपये) की समझौता राशि/रिकवरी हुई। इनमें से 34,816 प्री-लिटिगेशन मामलों में से 32,843 मामलों का निपटारा करते हुए ₹79,07,95,600/- की राशि का समझौता हुआ, जबकि 3,431 लंबित अदालती मामलों में से 2,188 मामलों का निपटारा करते हुए ₹20,72,27,193/- की राशि का समझौता हुआ।

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान विभिन्न श्रेणियों के मामलों का बड़े स्तर पर निपटारा किया गया। बैंक रिकवरी से संबंधित 9,826 मामलों का निपटारा करते हुए ₹73,38,63,838/- की रिकवरी की गई। वित्तीय मामलों (लोन रिकवरी एवं एन.पी.ए.) के 2,803 मामलों में ₹11,13,62,780/- की राशि का समझौता हुआ। परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 से संबंधित 363 मामलों में ₹10,51,85,696/- की रिकवरी हुई। इसी तरह मोटर दुर्घटना दावों के 10 मामलों में ₹1,53,20,000/- का मुआवजा दिया गया। इसके अलावा 361 दीवानी मामले, 1,972 समझौता योग्य आपराधिक मामले, 798 ट्रैफिक चालान, 50 श्रम विवाद, 9 उपभोक्ता मामले तथा हजारों राजस्व विभाग से संबंधित मामलों का भी निपटारा किया गया।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान कई प्रेरणादायक सफलता की कहानियां सामने आईं। श्री अमनदीप सिंह घुम्मण, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमृतसर की अदालत में “Punjab & Sind Bank बनाम Simmi Arora” शीर्षक वाला लगभग ₹60,00,000/- का लंबे समय से चल रहा लोन विवाद आपसी सहमति से निपटाया गया। अदालत द्वारा किए गए निरंतर सुलह-सफाई के प्रयासों तथा दोनों पक्षों के वकीलों के सहयोग से शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली और लंबे समय से चल रहे मुकदमे का अंत हुआ।

इसी प्रकार श्री करण अग्रवाल, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमृतसर की अदालत में एक प्री-लिटिगेशन मामले में एक किसान ने पशुपालन के लिए ₹1,60,000/- का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन लिया था। वर्ष 2024 में पंजाब में आई बाढ़ के कारण उसके पशुओं की मृत्यु हो गई और वह आर्थिक रूप से काफी प्रभावित हुआ। लोक अदालत में हुई बातचीत के दौरान बैंक ने मानवीय आधार पर केवल ₹56,000/- में पूरे लोन का समझौता कर लिया, जिससे कर्जदार को बड़ी राहत मिली।

श्रीमती जैस्मीन, सिविल जज (जूनियर डिवीजन), अमृतसर की अदालत में वर्ष 2018 से लंबित दीवानी मुकदमा “Amit Dilawari बनाम Sunil Khurana एवं अन्य” आपसी समझौते से निपटाया गया। आठ वर्ष से अधिक समय से चल रहे इस विवाद का अंत लोक अदालत के माध्यम से हुआ।

इसी प्रकार श्री स्पर्श पुरी, सिविल जज (जूनियर डिवीजन)-कम-ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अमृतसर की अदालत में 13,15,894/- रुपये की राशि वाले मामलों का समझौता करवाकर लोक अदालत प्रणाली पर लोगों के बढ़ते विश्वास को और मजबूत किया गया।

राष्ट्रीय लोक अदालत की एक अत्यंत संवेदनशील एवं मानवीय सफलता मोटर दुर्घटना दावा मामले (एमएसीटी) में सामने आई, जिसकी सुनवाई श्रीमती जतिंदर कौर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अमृतसर की अगुवाई वाली पीठ द्वारा की गई। यह मामला बटाला से संबंधित एक स्कूल बस दुर्घटना से जुड़ा हुआ था, जिसमें एक महिला के पति की मृत्यु हो गई थी और दुर्घटना के दौरान लगी चोटों के कारण उसके गर्भ में पल रहे अजन्मे बच्चे की भी मृत्यु हो गई। लोक अदालत में आपसी सहमति से इस मामले का निपटारा करते हुए पीड़ित विधवा को कुल 10,00,000/- रुपये का मुआवजा दिया गया, जिसमें 8,00,000/- रुपये पति की मृत्यु तथा 2,00,000/- रुपये गर्भ में पल रहे अजन्मे बच्चे की मृत्यु के लिए दिए गए। समझौते के बाद मौके पर ही पीठ द्वारा मुआवजे के चेक पीड़िता को सौंपे गए, जिससे उसे तत्काल आर्थिक सहायता मिली और लंबी अदालती प्रक्रिया से राहत मिली।

जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, अमृतसर ने इस राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए समस्त न्यायिक अधिकारियों, वकील समुदाय, बैंकों, बीमा कंपनियों, सरकारी विभागों, न्यायालय के कर्मचारियों, पैरा लीगल वालंटियर्स तथा सभी मुकदमेबाजों का धन्यवाद किया।

प्राधिकरण ने यह भी दोहराया कि लोक अदालतें लोगों को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं तथा आम लोगों से अपील की कि वे भविष्य में भी लोक अदालतों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

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