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डी.एल.एस.ए. अमृतसर द्वारा पोक्सो एक्ट, 2012 संबंधी जागरूकता-सह-प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन

कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 29 सितंबर 2026: माननीय श्रीमती जतिंदर कौर, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-चेयरपर्सन, जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी (डी.एल.एस.ए.), अमृतसर के कुशल मार्गदर्शन तथा श्री अमरदीप सिंह बैंस, चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, डी.एल.एस.ए. अमृतसर के नेतृत्व में जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी, अमृतसर द्वारा बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने संबंधी पोक्सो एक्ट, 2012 के बारे में एक विशेष जागरूकता-सह-प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन किया गया।
यह सेमिनार राष्ट्रीय कानूनी सेवाएं अथॉरिटी (नालसा) और पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं अथॉरिटी (पुसला) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य कानूनी जागरूकता को मजबूत करना, कानून लागू करने वाली एजेंसियों की क्षमता में वृद्धि करना तथा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करना था।
इस अवसर पर श्री जसविंदर सिंह, डी.एस.पी., क्राइम अगेंस्ट वूमेन एंड चाइल्ड, विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। सेमिनार में अमृतसर ग्रामीण और अमृतसर कमिश्नरेट के विभिन्न पुलिस थानों में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों से संबंधित मामलों की जांच और निपटारे के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।
सेमिनार के दौरान नालसा और पुसला द्वारा महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, सहायता और पुनर्वास के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं तथा कानूनी सेवाओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। इसके साथ ही जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 के तहत बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (सी.डब्ल्यू.पी.ओ.) और विशेष किशोर पुलिस इकाई (एस.जे.पी.यू.) की भूमिकाओं एवं जिम्मेदारियों के बारे में भी जानकारी दी गई।
बच्चों से संबंधित मामलों में बाल-अनुकूल प्रक्रियाएं अपनाने तथा हर चरण पर उनकी सुरक्षा, गरिमा, निजता और गोपनीयता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बाल पीड़ितों तथा देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित मामलों को पूरी संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार निपटाने के लिए जागरूक किया गया।
सेमिनार के दौरान लापता बच्चों की तलाश, उनकी सुरक्षा, देखभाल, कानूनी सहायता और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, जिला बाल संरक्षण इकाई (डी.सी.पी.यू.), जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी, गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओ.) और बाल देखभाल संस्थानों के बीच प्रभावी समन्वय के महत्व को भी उजागर किया गया।
इस अवसर पर डी.एल.एस.ए. अमृतसर द्वारा मुफ्त कानूनी सेवाएं उपलब्ध करवाने, कानूनी जागरूकता फैलाने, पीड़ितों को सहायता प्रदान करने, विभिन्न संबंधित पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने तथा समाज के कमजोर वर्गों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में निभाई जा रही भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
पोक्सो एक्ट के तहत पुलिस अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें विशेष रूप से मामलों की संवेदनशीलता के साथ जांच करने, बाल पीड़ितों और गवाहों के साथ उचित तरीके से व्यवहार करने, उनके कानूनी अधिकारों और हितों की रक्षा करने तथा पूरी आपराधिक न्याय प्रक्रिया के दौरान बच्चों की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया गया।
यह सेमिनार डी.एल.एस.ए. अमृतसर द्वारा समाज के कमजोर वर्गों तक कानूनी सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने, संबंधित संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने और आपसी समन्वय को मजबूत करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का हिस्सा था।
सेमिनार के समापन अवसर पर बाल-अनुकूल, संवेदनशील और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने तथा पोक्सो एक्ट सहित बच्चों की सुरक्षा से संबंधित अन्य कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।
ऐसे जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से डी.एल.एस.ए. अमृतसर बच्चों के अधिकारों की रक्षा, न्याय तक पहुंच को बढ़ावा देने तथा नालसा, पुसला और डी.एल.एस.ए. के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर मजबूत कर रही है।

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