
कल्याण केसरी न्यूज़, अमृतसर, 2 अक्टूबर 2026 : माननीय श्री न्यायमूर्ति दीपक सिबल, न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय तथा कार्यकारी अध्यक्ष, पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (पीयूएलएसए) ने आज जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण (डीएलएसए), अमृतसर के कार्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालय के अधिकारियों, मध्यस्थों तथा विधिक बिरादरी के सदस्यों के साथ बातचीत करते हुए कानूनी जागरूकता, न्याय तक पहुंच तथा वैकल्पिक विवाद समाधान से संबंधित पहलों की विस्तृत समीक्षा की।
इस अवसर पर सुश्री जतिंदर कौर, माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, डीएलएसए अमृतसर; श्री अमरदीप सिंह बैंस, माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, डीएलएसए अमृतसर; श्री गुरप्रीत सिंह पनेसर, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन अमृतसर सहित बार के विभिन्न सदस्य, पैनल अधिवक्ता तथा मध्यस्थ उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में माननीय न्यायमूर्ति सिबल ने समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर कमजोर एवं वंचित वर्गों तक कानूनी सहायता पहुंचाने में कानूनी सेवाएं प्राधिकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी सेवाएं केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निरंतर जागरूकता अभियानों के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों तथा आम जनता तक भी पहुंचनी चाहिए।
पॉस्को अधिनियम के संबंध में व्यापक जागरूकता
बैठक के दौरान स्कूलों एवं कॉलेजों में बच्चों को प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फॉर सेक्शुअल ओफेंसिस (पॉस्को) एक्ट के संबंध में अधिक से अधिक जागरूक करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप एवं संवेदनशील तरीके से सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, व्यक्तिगत सुरक्षा, उनके अधिकारों तथा सहायता प्राप्त करने के उपलब्ध माध्यमों के बारे में जानकारी देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
डीएलएसए अमृतसर को शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए शिक्षकों, अभिभावकों तथा अन्य संबंधित हितधारकों को भी पॉस्को अधिनियम के सुरक्षात्मक प्रावधानों के संबंध में जागरूक करने हेतु प्रभावी कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा गया।
नशा-विरोधी जागरूकता को व्यापक बनाने पर जोर
नशे की समस्या को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायमूर्ति सिबल ने विशेष रूप से 16 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए नशा-विरोधी जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा समाज का महत्वपूर्ण आधार हैं और उन्हें नशे के स्वास्थ्य, सामाजिक, कानूनी तथा दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के बारे में समय रहते जागरूक करना नशा रोकथाम के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इन अभियानों के लिए स्कूलों एवं कॉलेजों को प्रमुख मंच बनाते हुए डीएलएसए, शिक्षकों, अधिवक्ताओं तथा मध्यस्थों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने तथा जिम्मेदार निर्णय लेने के लिए जागरूक एवं प्रेरित करने पर जोर दिया गया।
मध्यस्थता एवं विवाद समाधान को सुदृढ़ करना
विधिक बिरादरी के साथ बातचीत के दौरान मध्यस्थता को एक प्रभावी वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) तंत्र के रूप में बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। माननीय न्यायमूर्ति सिबल ने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि जहां कानूनन उचित हो, वहां पक्षकारों को आपसी सहमति एवं सौहार्दपूर्ण तरीके से विवादों का समाधान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि सफल मध्यस्थता से न केवल न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि पक्षकारों को भी अपने विवादों का रचनात्मक एवं पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
कानूनी सहायता योजनाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर
माननीय न्यायमूर्ति सिबल ने कहा कि कानूनी सेवाएं व्यवस्था का मूल उद्देश्य सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों से परे प्रत्येक व्यक्ति के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना है। इस संबंध में निःशुल्क कानूनी सहायता, कल्याणकारी योजनाओं तथा मध्यस्थता सेवाओं के बारे में जागरूकता को कानूनी साक्षरता शिविरों, सामुदायिक पहुंच कार्यक्रमों तथा अन्य जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में न्यायपालिका, डीएलएसए तथा बार की ओर से बाल संरक्षण, नशा-विरोधी जागरूकता, कानूनी सशक्तिकरण तथा न्याय तक पहुंच से संबंधित पहलों को और मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई, ताकि समाज को अधिक कानूनी रूप से जागरूक एवं जिम्मेदार बनाया जा सके।

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